ब्रेन हेमरेज और ज्योतिष

आजकल के भागदौड़ भरे जीवन में काम की अधिकता के कारण, तनाव, चिंता के कारण हमारे शरीर में कई प्रकार के रोग हो जाते हैं, जिनमें एक रोग मस्तिष्क रक्तस्राव (ब्रेन हेमरेज) है। शारीरिक एवं मानसिक विकलांगता, लकवा तथा दर्दनाक मौत का कारण बनते हैं । ‘ब्रेन हेमरेज’ के प्रकोप में आजकल तेजी से वृद्धि हो रही है। भारत में हर साल 1000000 लोग इससे पीड़ित हो रहे हैं । पहले इसका शिकार वृद्ध व्यक्ति ही होते थे परंतु आज के समय में कम उम्र के लोग भी इसका शिकार हो जा रहे हैं। 
  मस्तिष्क रक्तस्राव के मुख्य कारण तो उच्च रक्तचाप, एन्यूरिज्म और आर्टिरियोवीनस मालफार्मेशन है। लेकिन मधुमेह, मोटापा, शराब, भाग-दौड़, दिमागी तनाव और धूम्रपान आदि ब्रेन हेमरेज की आशंका को बढ़ाते हैं।
    मधुमेह रोगियों तथा उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोग, जो रक्तचाप को नियंत्रण में नही रखते हैं, उनमें दिमाग की नस का फटना आम बात है। लेकिन कभी-कभी ऐसा भी देखने में आया है कि सामान्य रक्तचाप वालों की भी दिमागी नस फट जाती है, जिसे स्पांटेनियस हेमरेज कहते हैं। ऐसा मस्तिष्क के अंदर एन्युरिज्म, या आर्टिरियोवीनस मालफार्मेशन के कारण होता है। मस्तिष्क विशेषज्ञों (न्यूरो सर्जन) का मानना है कि एन्युरिज्म में दिमाग में खून की नलियों के अंदर एक प्रकार का गुब्बारा, रोग के कारण, फट जाता है, तो रोगी को ब्रेन हेमरेज हो जाता है और मरीज बेहोश हो जाता है, जबकि आर्टिरियोवीनस मालफार्मेशन में दिमाग में खून की नसों का एक असामान्य गुच्छा बन जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह गुच्छा पैदाइशी होता है और व्यक्ति की उम्र बढ़ने के साथ-साथ यह भी बढ़ता रहता है और एक समय ऐसा आता है कि मस्तिष्क का अधिक से अधिक रक्त इस आर्टिरियोवीनस मालफार्मेशन से हो कर जाने लगता है, जिस कारण मस्तिष्क के दूसरे भाग में, रक्त की आपूर्ति कम कर के, अधिकांश रक्त को अपने अंदर इक्ट्ठा कर लेता है। दूसरे भाग को रक्त की आपूर्ति नहीं मिल पाती। इस स्थिति को स्त्री लिंग फेनोमेना कहते हैं और इसमें आर्टिरियोवीनस मालफार्मेशन मस्तिष्क के दूसरे भाग में, रक्त की आपूर्ति कम कर के, अधिकांश रक्त को अपने अंदर इक्ट्ठा कर लेता है, जिसकी वजह से वह फट जाता है। एन्युरिज्म के रोगी का इलाज यदि गुब्बारा फटने के चार घंटे के अंदर शुरू हो जाए, तो रोग का पता लगाया जा सकता है और तुरंत शल्य चिकित्सा द्वारा फटे हुए गुब्बारे को सील कर दिया जाता है। एन्युरिज्म का इलाज जल्द न होने पर इसके दोबारा फटने की आशंका बहुत ज्यादा होती है। अगर पहले ब्रेन हेमरेज से रोगी बच भी जाए, तो दूसरी या तीसरी बार नस फटने पर रोगी का जीवित रहना मुश्किल हो जाता है। इसी प्रकार अर्टिरियोवीनस मालफार्मेशन में भी रोगी का जल्द इलाज होना आश्यक है। एन्युरिज्म, या अर्टिरियोवीनस मालफार्मेशन के कारण होने वाला ब्रेन हेमरेज युवा और मध्य वर्ग के लोगों में ज्यादा पाया जाता है, जबकि रक्तचाप और मधुमेह के कारण होने वाला ब्रेन हेमरेज बुजुर्ग लोगों में अधिक होता है। इसलिए जिस परिवार में किसी व्यक्ति को मधुमेह, या उच्च रक्तचाप की समस्या नहीं रही हो और उस परिवार के किसी व्यक्ति को ब्रेन हेमरेज हो जाता है, तो उसका कारण मधुमेह और रक्तचाप नहीं, बल्कि 75 प्रतिशत एन्युरिज्म, या आर्टिरियोवीनस मालफार्मेशन होता है। एन्युरिज्म और आर्टिरियोवीनस मालफांर्मेशन ज्यादातर 20 से 40 वर्ष के लोगों को ही होता है और इन्हीं लोगों पर पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियां होती हैं। इसलिए ऐसे मामलों में जरा भी देर नहीं करनी चाहिए तथा, जितनी जल्दी हो सके, जांच करवा कर इलाज करवाना चाहिए। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि एन्युरिज्म और आर्टिरियोवीनस मालफार्मेशन का रोग पुरुषों और महिलाओं में सामान्य रूप से पाया जाता है। लेकिन उच्च रक्तचाप के कारण होने वाला ब्रेन हेमरेज ज्यादातर पुरुषों में ही अधिक होता है, क्योंकि उन पर सामाजिक और व्यावसायिक तनाव अधिक होते हैं, जबकि एन्युरिज्म्म तथा आर्टिरियोवीनस मालर्फोशन का तनाव से कोई संबंध नही होता। यह तो खूनी नसों और नाड़ियों की कमजोरी है। नस फटने के बाद रोगी के सिर में अचानक बहुत तेज दर्द होता है और रोगी बेहोश हो जाता है, या रोगी को मिर्गी का दौरा आता है, या उसका एक हाथ, या पैर काम करना बंद कर देते हैं। यह रोग 10 साल के बच्चे को भी हो सकता है।
रोग के लक्षण : जब किसी व्यक्ति को लगातार सिर और गर्दन में तेज दर्द हो और आंखों के आगे अंधेरा छा जाता हो, जो आम दवाओं से ठीक नहीं हो रहा हो, तो इसे मामूली नहीं समझना चाहिए। इसका इलाज फौरन न्यूरो सर्जन से करवाना चाहिए। ब्रेन हेमरेज के यही लक्षण हैं। उपाय : बेन हेमरेज का एक मात्र उपाय शल्य चिकित्सा ही है। दवाइयों से यह ठीक नहीं होता। इसलिए जब भी सिर और गर्दन में दर्द हो और दवाइयों से ठीक नहीं हो रहा हो, तो शल्य चिकित्सा द्वारा ब्रेन हेमरेज से बचा जा सकता है। ब्रेन हेमरेज होने के बाद शल्य चिकित्सा के अलावा और कोई चारा नहीं रहता है।
आइए हम ब्रेन हेमरेज के मामले को ज्योतिष के माध्यम से समझने का प्रयास करते हैं। जन्म कुंडली के प्रथम भाव प्रथम , प्रथम भाव के स्वामी ग्रह , सूर्य , बुध और मंगल पर यदि अधिक से अधिक पाप प्रभाव हो तो यह रोग होता है।
प्रथम भाव और लग्नेश काल पुरुष की कुंडली में सिर और मस्तिष्क का नेतृत्व करते हैं। यदि प्रथम भाव और लग्नेश पाप ग्रहों के दुष्प्रभाव में हो या लग्नेश नीच का हो तो मस्तिक से संबंधित रोग होते है ।
  काल पुरुष के प्रथम भाव में मेष राशि आता है जिसका स्वामी मंगल है अतः मंगल और मेष राशि पीड़ित हो तो सिर और मस्तिष्क संबंधित समस्या होता है। मंगल शक्ति उर्जा का कारक है साथ ही मंगल ब्लड का भी कारक है। 
  काल पुरुष की कुंडली में बुध रोग स्थान का स्वामी है। साथ ही बुध त्वचा एवं नसों का भी नेतृत्व करता है। हमारे शरीर में जो खून बहता है वह नसों में ही बहता है। ब्रेन हेमरेज में नस में कमजोरी आ जाता है। जिसके कारण रक्त के बहाव में रुकावट के कारण गुब्बारा बनकर फट जाता है। जिसका कारण सिर की नसों में कमजोरी तथा उस में बहने वाले रक्तचाप का उच्च रक्तचाप होना है।
  प्रथम भाव का कारक सूर्य है अतः सूर्य से भी सिर मस्तिष्क का विचार किया जाता है सूर्य ऊर्जा का भी कारक है।
 यह रोग सूर्य, मंगल, बुध और  लग्नेश यदि कमजोर और पीड़ित हो और इनकी दशा आ जाए  तथा गोचर में भी सूर्य , मंगल , बुध और लग्नेश कमजोर हो पाप पीड़ित हो तब होते हैं।
उपाय
1, बंदर को गुड़ खिलाएं।
2, देवी कवचं का पाठ करें।
3, पद्मासन में बैठ जाए दोनों हाथ को फैलाकर घुटने पर रख ले, हथेली के खुले हुए भाग को आकाश की ओर रखें । तर्जनी उंगली और अंगूठे के अग्रभाग को आपस पर मिला दे शेष उंगलियों को आपस में मिलाकर सीधी रखें। योगा को प्रतिदिन 45 मिनट करें।
4, पद्मासन में बैठ जाए, हाथ को फैलाकर घुटने में रख ले , हाथ के खुले हुए भाग को अकाश की ओर रखें। तर्जनी उंगली के अग्रभाग को अंगूठे के जड़ से मिला दे , अनामिका और मध्यमा उंगली के अग्रभाग को अंगूठा के अग्रभाग से मिला दे यह क्रिया दोनों हाथों से करें। शेष उंगलियों को सीधी रखें  । इस योगा को प्रतिदिन 45 मिनट करें ।



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