ग्रहों की शीर्षोदयादी संज्ञा

वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की संज्ञा को तीन भागों में बांटा गया है।
शीर्षोदय
इसके अंतर्गत शुक्र चंद्र और बुध ग्रह आते हैं।
पृष्ठोदय
इसके अंतर्गत सूर्य, मंगल, शनि, राहु और केतु ग्रह आते हैं।
उभयोदय
इसके अंतर्गत बृहस्पति ग्रह आता है।
उपयोगिता
तीन संख्याओं का उपयोग दशा दशा फल में, प्रश्न कुंडली में किया जाता है।
 पृष्ठोदय ग्रह अपनी दशा के अंतिम भाग में विशेष फल देता है
शीर्षोदय ग्रह अपनी दशा के प्रारंभ में विशेष फल देता है।
उभयोदय ग्रह अपनी दशा के मध्य में विशेष फल देता है।

मान लीजिए आपके पास विवाह संबंधित प्रश्न आया है जिसमें 2 कन्याएं देखी गई है। दोनों ही अच्छी सुंदर सु संस्कारित है जिस में से किसी एक कन्या के साथ विवाह करना है। इस बात का निर्णय लेना आसान नहीं है कि किसके साथ विवाह करें। तो प्रश्न के समय प्रश्न कुंडली में यदि शीर्षोदय राशि लग्न में हो और शीर्षोदय ग्रह लग्न में हो तो जातक को बोले कि जिस कन्या को आप ने पहले देखा है उसी कन्या से विवाह करें।

Comments

Popular posts from this blog

दशमांश कुंडली का महत्व

चर स्थिर एवं द्विस्वभाव राशियां

ब्रांड