विवाह के पश्चात भाग्य उदय
ज्योतिष में कुछ ऐसे विशेष ग्रह योग होते हैं जिनमे व्यक्ति का भाग्योदय स्त्री के द्वारा होता है अर्थात कुछ विशेष ग्रह–स्थितियों में व्यक्ति को विवाह होने के उपरांत विशेष भाग्योदय और सफलता मिलती है तथा जीवन में विवाह और पत्नी के आगमन के बाद व्यक्ति के जीवन सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं क्योंकि कुछ पुरूषों की कुंडली में कुछ ऐसे विशेष ग्रह योग होते हैं जिनमे स्त्री ही उनके भाग्योदय का कारण बनती है और जीवन में उनकी पत्नी का आगमन होने के बाद ही भाग्योदय होता है । इस पर एक छोटा सा लेख ।
पुरुषों की कुण्डली में “शुक्र” को पत्नी और वैवाहिक जीवन का कारक ग्रह माना गया है । इसके अलावा सप्तम भाव और सप्तमेश विवाह और वैवाहिक जीवन को नियंत्रित करते हैं। इन्ही ज्योतिषीय घटकों की कुछ विशेष स्थितियां व्यक्ति को स्त्री के माध्यम से भाग्योदय देता है।
1. कुंडली में बारहवे भाव का भाग्योदय से भी सम्बन्ध होता है बारहवे भाव में स्थित ग्रह व्यक्ति का भाग्योदय कराता है अतः जिन पुरुषों की कुंडली में शुक्र बारहवे भाव में स्थित होता है उनका विशेष भाग्योदय उनके विवाह के बाद ही होता है, ऐसे लोगों के विवाह के बाद उनके जीवन में विशेष साफलताएं मिलती हैं और पत्नी जीवन में बहुत सहायक होती है।
यह स्थिति मेष लग्न कुंडली में बनता है। जहां शुक्र द्वितीय और सप्तम भाव का स्वामी होकर गुरु की राशि में उच्च का द्वादश भाव में होता है। साथ ही गुरु की द्वितीय राशि धनु भाग्य भाव मैं पढ़ता है। यहां एक बात अवश्य देखें कि गुरु की स्थिति कुंडली में कैसा है। यदि गुरु बली है और शुभ प्रभाव में है तो निश्चित ही विवाह के बाद भाग्य उदय होता है।
2. जिन लोगों की कुंडली में शुक्र दशम भाव में हो या चतुर्थ भाव में होकर दशम भाव पर शुक्र की दृष्टि हो तो ऐसे में भी व्यक्ति के विवाह के बाद भाग्योदय और करियर में विशेष सफलताएं मिलता हैं। पत्नी का जीवन में आगमन जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।
3. पुरूषों की कुंडली में शुक्र यदि नवम भाव में हो या तीसरे भाव में होकर भाग्य स्थान को देख रहा हो तो ऐसे में भी जीवन में पत्नी के आगमन अर्थात विवाह के बाद भाग्य में उन्नति होता है ।
4. शुक्र का दशमेश और भाग्येश के साथ होना भी स्त्री से सफलता और भाग्योदय देता है।
5. दशमेश और सप्तमेश का रशिपरिवर्तन अर्थात सप्तमेश दशम भाव में और दशमेश सप्तम भाव में हो तो ऐसे में भी व्यक्ति के विवाह के उपरांत जीवन में विशेष उन्नति होता है।
6. सप्तमेश और नवमेश का राशि परिवर्तन भी जीवन में पत्नी के आगमन के बाद विशेष भाग्योदय देता है।
7. पुरुषों की कुंडली में सप्तमेश का नवम या दशम भाव में स्थित होना या सप्तमेश का नवम या दशम भाव को देखना भी विवाह उपरांत विशेष सफलता और भाग्योदय देता है।
8. कुंडली में यदि सप्तमेश या शुक्र दशम भाव में हों या दशम भाव को देखते हों तो ऐसे में पत्नी भी वर्किंग होती है और जीवन निर्वाह में सहायक होती है।
9. सप्तमेश का भाग्येश और दशमेश के साथ योग होना भी जीवन में पत्नी के आगमन के बाद भाग्योदय देता है।
पुरुषों की कुंडली में इन कुछ विशेष ग्रहयोगों के उपस्थित होने पर व्यक्ति के जीवन में स्त्री सफलता का कारण बनती है और विवाह उपरांत जीवन में पत्नी के आगमन के बाद विशेष भाग्योदय होता है।
इस स्थिति में पुरुष को अपनी पत्नी से हमेशा बनाकर रखना चाहिए उनका मान सम्मान करना चाहिए। वैसे तो सभी स्थिति में मान सम्मान करना चाहिए । तो पुरुष विवाह के पश्चात ज्यादा सफल होता है। पति पत्नी को दुख तकलीफ देता है तो व्यापार भी प्रभावित होता है।
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