जब चाहत शिखर का होता है

जब चाहत शिखर का होता है ।
तो छल कपट का सामना करना पडता है ।
जब चाहत शिखर का होता है ।
तब संघर्षों के दौर से गुजरना पडता है ।
जब चाहत शिखर का होता है ।
तब काटो पर भी चलना पडता है ।
जब चाहत शिखर का होता है ।
तब साजिशों के चक्रव्युह का सामना करना पडता है ।
जब चाहत शिखर का होता है ।
तब अपने भी धोखा देते है ।
जब चाहत शिखर का होता है ।
तब प्रियों से बीछडना पडता है ।
जब चाहत शिखर का होता है ।
तो दुश्मन भी हरफन मौला होता है ।
जब चाहत शिखर का होता है ।
तब मुसीबत का रोना जो रोता है ,
वह फर्श मे मिल जाता है ।
जब चाहत शिखर का होता है ।
तो आग में जल कर कुंदन बनना पडता है । 
और तब शिखर पर पहुँचता है ।
  ✍️एस्ट्रो राजेश्वर आदिले

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